हरिद्वार–देहरादून रेल मार्ग पर रेल हादसा: हावड़ा एक्सप्रेस की टक्कर से शिशु हाथी की मौत, ट्रेनें घंटों रुकीं

रायवाला/हरिद्वार, उत्तराखंड: हरिद्वार–देहरादून रेल मार्ग पर रविवार सुबह दिल दहला देने वाला वन्यजीव हादसा सामने आया, जब हावड़ा एक्सप्रेस की चपेट में आने से एक शिशु हाथी की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना मोतीचूर और रायवाला स्टेशन के बीच, राजाजी टाइगर रिज़र्व की हरिद्वार रेंज (हरिद्वार वन प्रभाग) के मोतीचूर वन क्षेत्र में सुबह करीब 06:00 बजे घटी।

घटनास्थल रेलवे ट्रैक के उस हिस्से में आता है, जहां अक्सर हाथियों और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही देखी जाती है। जानकारी के अनुसार, हाथियों का एक झुंड ट्रैक पार कर रहा था। बड़े हाथी सुरक्षित रूप से जंगल की ओर आगे बढ़ गये, लेकिन झुंड के साथ चल रहा शिशु हाथी अचानक तेज़ रफ्तार ट्रेन की पकड़ में आ गया और टक्कर से मौके पर ही उसकी जान चली गई।

रेल यातायात रहा बाधित, प्रमुख ट्रेनें रोकी गईं

हादसे के बाद हरिद्वार–देहरादून रेल खंड पर ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहा। देहरादून से दिल्ली की ओर जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस और उपासना एक्सप्रेस को रायवाला स्टेशन पर एहतियातन रोक दिया गया। वहीं, राजाजी क्षेत्र से गुजरने वाले अन्य ट्रेन चालक दलों को भी गति नियंत्रित करने और सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गये।

रेलवे सूत्रों ने बताया कि वन विभाग और रेलवे की संयुक्त टीम द्वारा ट्रैक का निरीक्षण, शव हटाने की प्रक्रिया और घटनास्थल की सुरक्षा कार्रवाई पूरी करने के बाद ही संचालन को सामान्य किया जा सका।

वन विभाग ने संभाला मोर्चा, लोको पायलट हिरासत में

सूचना मिलते ही हरिद्वार वन रेंज के अधिकारी और राजाजी रिज़र्व की टीम घटनास्थल पर पहुँची और प्रारंभिक जांच शुरू की। मामले की गंभीरता के चलते ट्रेन के लोको पायलट को हिरासत में लिए जाने की सूचना है, हालांकि विभागीय अधिकारी इस कदम को जांच प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं। दुर्घटना की परिस्थितियों, ट्रेन की गति, और उस समय की विज़िबिलिटी जैसे सभी बिंदुओं की गहन पड़ताल की जा रही है

जंगल में बढ़ती चुनौतियां, सुरक्षा पर फिर सवाल

राजाजी टाइगर रिज़र्व से गुजरने वाला यह रेलवे ट्रैक क्षेत्र पहले भी एलिफ़ेंट कॉरिडोर के लिहाज़ से संवेदनशील घोषित किया जा चुका है, बावजूद इसके ट्रेन–जंगली जानवर टकराव की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • कॉरिडोर पर ट्रेन की गति और समय-वार प्रतिबंध की सख्ती बढ़ाई जाए

  • ट्रैक किनारे अलर्ट सेंसर और अर्ली-वार्निंग सिस्टम लगाए जाएं

  • वन्यजीव आवागमन के समय सायरन आधारित चेतावनी प्रणाली सक्रिय रखी जाए

  • जंगल और रेलवे में बेहतर समन्वय व्यवस्था विकसित की जाए

पर्यावरण प्रेमियों में शोक, न्याय की मांग

इस घटना के बाद स्थानीय लोग और पर्यावरण संरक्षक संगठनों में गहरा दुख और आक्रोश है। सोशल मीडिया और स्थानीय मंचों पर हाथियों की ट्रैक सुरक्षा को लेकर फिर बहस तेज़ हो गई है। लोगों की मांग है कि यह हादसा वन्यजीव हितों की सुरक्षा योजना को और मजबूत करने का आखिरी अलार्म साबित होना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे टकराव माँ गंगा की धरती पर दोबारा न हों